
UCC क्या है ?
यह यूनिफार्म सिविल कोड UCC विविध संबंधित क्षेत्रों, जैसे विवाह, तलाक, वंशानुगत संपत्ति, अंगीकार, उच्च न्यायालयों के कार्यालयी विवाद आदि पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य सामान्यतः सभी नागरिकों के लिए न्यायिक सुरक्षा, सामान्यता और संवेदनशीलता सुनिश्चित करना होता है।
UCC का full form क्या होता है–
“यूनिफार्म सिविल कोड” (Uniform Civil Code) हिन्दी में इसे समान नागरिक संहिता कहते है ।
यह एक कानूनी प्रणाली है जिसका उद्देश्य एक समान नागरिक संहिता के तहत सभी नागरिकों के लिए समान और विशेष कानूनों की एकता सुनिश्चित करना होता है। यह भारतीय संविधान के नेतृत्व में अधिकांश देशों में अपनाई जाती है, जहां समान नागरिकी अधिकारों और कर्तव्यों को सुनिश्चित करने के लिए यूनिफार्म सिविल कोड या यूनिफार्म संविधानिक कोड प्रणाली को अपनाया गया है।
यह सिविल कोड आपराधिक न्याय, वाणिज्यिक न्याय, लेखा न्याय आदि के अलावा सामान्य सिविल न्याय के भी क्षेत्रों पर लागू होता है। यह एक समान संविधानिक मानदंड स्थापित करने का प्रयास करता है और अलग-अलग समुदायों और धर्मों के बीच न्यायिक विवादों के प्रश्नों को सुलझाने का प्रयास करता है।
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भारत में, UCC के लागू होने के विषय में चर्चाएं चल रही हैं। इसके प्रयास का मुख्य उद्देश्य धार्मिक समुदायों के अलग-अलग न्यायिक प्रणालियों के स्थान पर एक समान और यूनिफार्म सिविल कोड को स्थापित करना है। हालांकि, UCC का पूर्ण रूप और इसका लागू होने का समय और तरीका निर्धारित करने के लिए अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया
भारत में UCC की आवश्यकता क्यों है?
सामान्य नागरिकों के बीच संगठित रूप से व्यवस्थित और न्यायसंगत समाज बनाने के लिए एक संगठित नागरिक न्याय संहिता की आवश्यकता होती है, जिसमें सभी लोगों के लिए एक ही नागरिक संहिता होती है और वे सभी नागरिक इसे मानते हैं। इसी को भारत में भी लागू करने की आवश्यकता है ‘यूनिफार्म सिविल कोड’ या ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code, UCC) कहा जाता है।
भारत में UCC की आवश्यकता कई कारणों से है:–
- सामान्यतः भारत का नागरिकता संहिता धारा 44 के अनुसार, भारत का संविधानिक आदर्श साधारित रूप से UCC के अनुभाग को विशेष बनाता है, जिसका उद्देश्य समान वस्त्र और स्वतंत्रता का प्रशंसा करना है। इसे मध्य और उच्चतम न्यायालयों ने भी समर्थन किया है। इसके बावजूद, विभाजन के समय संघीय सरकार UCC को प्रारंभ नहीं कर पाई है और इसे राज्य सरकारों के अधीन छोड़ दिया गया है।
- वर्तमान में भारत में धार्मिक व्यक्तिगत कानून हैं, जिनमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख, जैन और ईसाई आदि धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग कानून हैं। इसके परिणामस्वरूप, विभिन्न सामाजिक समस्याओं का सामान्य समाधान नहीं हो सकता है, और अक्सर विवादों और आपत्तिजनक स्थितियों का कारण बनता है। UCC के द्वारा, धर्मानुसार नहीं, बल्कि सामान्य न्याय के आधार पर सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून लागू होगा।
- यह एक समान और इससे अलग धार्मिक विवादों को खत्म करने का माध्यम भी होगा। विवाह, तलाक, उपनयन, मृत्यु, संपत्ति, अदालती मामले, और अन्य सामाजिक मुद्दों पर विवादों का आधार धार्मिक व्यक्तिगत कानून पर आधारित होता है। इसके बजाय, यदि एक समान संघीय नागरिक संहिता होती है तो इससे ये समस्याएं आसानी से निपट सकती हैं।
- UCC एक मूल्यांकन का भी प्रतीक है और भारत के संघीय स्वरूप और सामाजिक विविधता के लिए एक सामान्य अंतर्राष्ट्रीय मानक समान करने का प्रयास है। इससे भारतीय समाज को अन्य देशों में स्वीकृति और सम्मान मिल सकता है।
- यह मामला सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, और न्यायिक पहलुओं का एक संयोजन है।
भारत में UCC के फायदें–
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code, UCC) भारतीय संविधान में विभिन्न धार्मिक सम्प्रदायों के सदस्यों के लिए एक समान नागरिक संहिता का संदर्भ है। इसका मकसद विभिन्न धार्मिक सम्प्रदायों के व्यक्तियों के बीच समानता, न्याय और सामान अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यूसीसी के कुछ फायदे निम्नलिखित हो सकते हैं:
- सामानता का संरक्षण: यूसीसी के माध्यम से, सभी नागरिकों को धर्म, जाति, लिंग या सेक्स पर आधारित भेदभाव से मुक्ति मिलती है। इससे समानता, न्याय, और अवसरों का समान वितरण सुनिश्चित होता है।
- संघर्ष में कमी: विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच अलग-थलग नागरिक संहिता की अभावता व्यक्तिगत और सामाजिक विवादों का कारण बनती है। यूसीसी के माध्यम से, इस संघर्ष को कम किया जा सकता है और लोगों को समान न्यायपूर्वक विवादों का समाधान प्राप्त हो सकता है।
- महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, यूसीसी के माध्यम से, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और समर्थन में सुधार हो सकता है। सामान्य नागरिक संहिता के तहत, महिलाओं को विवादों के मामले में अधिकारिक संरक्षण मिल सकता है और उन्हें परंपरागत सम्प्रदायिक प्रथाओं के प्रति सुरक्षा प्राप्त हो सकती है।
- संघीय एकता: भारत एक अखंड राष्ट्र है और यूसीसी के माध्यम से संघीय एकता को बढ़ावा मिल सकता है। समान नागरिक संहिता के अंतर्गत सभी नागरिकों को एक ही कानूनी प्रणाली का लाभ मिलता है, जो एक संघीय राष्ट्र की पहचान को मजबूत कर सकता है।
- सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्वक उपचार: यूसीसी के माध्यम से, सभी नागरिकों को उनके विवादों के लिए न्यायपूर्वक उपचार मिलता है। इससे सामाजिक न्याय की सुरक्षा बढ़ती है और लोगों के बीच विश्वास और समझदारी का माहौल बनता है।
UCC किन-किन देशों में लागू है?
UCC (Uniform Civil Code) एक वैधानिक प्रणाली है जो एक समान नागरिक धार्मिक और सामाजिक कोड का निर्माण करने का प्रयास करती है। इसे अनुष्ठानिक रूप से विभिन्न देशों में लागू किया गया है। निम्नलिखित देशों में UCC का लागूबंदी हुई है या होने की प्रक्रिया चल रही है:
- भारत में भारतीय संविधान के तहत, UCC के लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अनुसार, सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिकसंहिता का निर्माण किया जाना है। हालांकि, इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है और इस पर चर्चा और विपक्षी राजनीति जारी है।
- तुर्की: तुर्की ने 1926 में संविधान में UCC को अपनाया था। तुर्क संविधान में इसे “कदीमीकानूनु” के रूप में जाना जाता है।
- तुनिशिया: तुनिशिया ने 1956 में संविधान में UCC को अपनाया था। इसे “परिवार और नागरिक धार्मिक कोड” के रूप में जाना जाता है।
- इजराइल: इजराइल में नागरिकों के लिए सामान्य नागरिक धार्मिक कोड की अनुष्ठानिक प्रणाली है।
इसके अलावा अन्य देशों में भी कुछ राष्ट्रीय और स्थानीय कानूनों में धार्मिक समानता और उचित ढ़ंग से ध्यान देते हुए UCC के तत्वों को शामिल किया गया है।
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धन्यवाद